जज़्बा तो था कि बहुत कुछ
बदल के जायेंगे,
कुछ पगडंडियों को पक्का
रास्ता कर के जायेंगे,
जिधर से जायेंगे
मुस्कुरा के जायेंगे,
लेकिन ये क्या हुआ की मुस्कुराने
के लिए चेहरे बचे नहीं,
कुछ ज़माना हमे तो कुछ हम
ज़माने को जचे नहीं,
फिर भी हैरानी है की
कोशिश की उम्मीद अभी बाकी है,
शुक्र है की अभी आंसुओं ने
जिंदा रखा है हमें
वरना हम भी इस जहाँ के
एक और बुत हो गए होते।