Sunday, June 10, 2012

सपनों के साथ

 कुछ झूठे रिश्ते, कुछ सच्ची यादें 
कुछ ख़ुशी के झूठे वादे, कुछ सच्चे दर्द हक़ीक़त  के 
जब दोस्त कहो किसी को तो 
दोस्ती को उससे बड़ा कर दो 
और छूट जाये जब साथ कोई 
तो उसको खुद में समा के चलो 
कोई साथ चले न चले जीवन में 
तुम सबको साथ लिए चलना 
कुछ ज़ेहन में मीठी याद लिए 
कुछ कड़वे सच की बात लिए 
जब लगे कुछ टूटा सा जीवन में 
जब लगे कुछ  छूटा  सा जीवन में  
तब सपनों को और बड़ा कर दो 
सपनों सा जीवन और कहीं 
जीवन के सपने और कहीं 
सपनों के आगे सब कम है 
बस मान लो सपना जीवन है 

3 comments:

रूप said...

"सपनों को और बड़ा कर दो"

अच्छा है ये ख़याल... ज़िंदगी ऐसा ही एक नशा चाहती है जीने के लिए.. वरना इस छोटी सी ज़िन्दगी के, बेहद लंबे रास्तों पर चलते-चलते, एक ऊब दिल-ओ-दिमाग में घर कर जाती है. हाँलाकि ये भी हमारी फितरत का ही दोष है. कुछ भी करना हमारी आदत है, वजूद है कि खाली बैठने नहीं देता और इस करने से ही तमाम तरीके के दर्द हासिल करता है, किन्तु कोई सपना पूरा हो जाए तो अच्छा भी तो लगता है! तो क्यूँ न इस खुशफहमी की दुनिया का मज़ा लें. जख्म लगते हैं तो लगें, ठोकरें लगें तो ठहाकों में उड़ा दें, बस मुस्कुरा दें.

"बहुत अच्छा लिख रही हो. मेरी शुभकामनाएं"

"रूप" ११.०६.२०१२

isu said...

with the help of words,images,paints etc in the forms of novels,poems,movies,paintings,,they become live and influence others especially those who are Dream-Handicapped,incapable of Proper Dreaming,,

rashmi said...

Very well said...liked it a lot....bas maan lo jivan sapna hai....