Sunday, June 10, 2012

वफ़ा

वर्षों तड़पकर तेरे लिए 
मैं भूल गया हूँ कब से
अपनी आवाज़ की पहचान
भाषा जो मैंने सीखी थी, मनुष्य जैसा लगने के लिए
मैं उसके सारे अक्षर जोड़ कर भी
मुश्किल से तेरा नाम ही बना सका
मेरे लिए वर्ण अपनी ध्वनि खो बैठे बहुत देर से
मैं अब लिखता नहीं–
तेरे धुपहले अंगों की मात्र परछाईं पकड़ता हूँ
कभी तूने देखा है– लकीरों को बगावत करते ?
कोई भी अक्षर मेरे हाथों से
तेरी तस्वीर ही बनकर निकलता है
तू मुझे हासिल है(लेकिन) कदम भर की दूरी से
शायद यह कदम मेरी उम्र से नही
मेरे कई जन्मों से भी बड़ा है
यह कदम फैलते हुए लगातार
घेर लेगा मेरी सारी धरती को
यह कदम माप लेगा मृत आकाशों को
तू देश में ही रहना
मैं कभी लौटूँगा विजेता की तरह तेरे आँगन में
इस कदम को या मुझे
ज़रूर दोनों में से किसी को क़त्ल होना पडे़गा।



                                                            - पाश 

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