नानी तुम मेरी दादी होती
तो न जाना पड़ता तुमको मेरे घर से,
न सुनने पड़ते दुनिया के ताने,
ज़्यादा हक़ जमा पाती मैं तुम पर,
न करता आना कानी
वो बैंक वाला,
तुम्हारा अकाउंट खुलवाने में,
मेरा पता तुम्हारा पता होता,
न बनना पड़ता तुम्हे मेरा किराएदार
पता प्रमाण दिखाने के लिए,
मैं न तरसती रहती
तुम्हारे लड्डुओं के लिए
न तरसती रहती मैं
भरे पेट में भी तुम्हारी थाली से
एक निवाला चखने के लिए
न तरसती रहती मैं
तुमसे दो बातें करके सोने के लिए
नानी सुनो ना
या तो तुम इतनी अच्छी न होती
या तुम मेरी दादी होती।
तो न जाना पड़ता तुमको मेरे घर से,
न सुनने पड़ते दुनिया के ताने,
ज़्यादा हक़ जमा पाती मैं तुम पर,
न करता आना कानी
वो बैंक वाला,
तुम्हारा अकाउंट खुलवाने में,
मेरा पता तुम्हारा पता होता,
न बनना पड़ता तुम्हे मेरा किराएदार
पता प्रमाण दिखाने के लिए,
मैं न तरसती रहती
तुम्हारे लड्डुओं के लिए
न तरसती रहती मैं
भरे पेट में भी तुम्हारी थाली से
एक निवाला चखने के लिए
न तरसती रहती मैं
तुमसे दो बातें करके सोने के लिए
नानी सुनो ना
या तो तुम इतनी अच्छी न होती
या तुम मेरी दादी होती।
5 comments:
Great one dear.....
I forgot ..somebody was explaining a poem to me, exactly same context and meaning..I must say this poem is really sweet..and that person is really great for me..
good one :)
This is really beautiful. So touching!
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