तुम मेरे चिर चिंतन में
तुम मेरे जग जीवन में
तुम मेरे संसाधन में
तुम मेरे आंगन में
तुम हो मेरे होने में
तुम मेरे आलिंगन में
तुम मेरे स्वर स्पंदन में
तुम मेरे अवलोकन में
तुम मेरे अल्ल्हड़पन में
तुम हो मेरे होने में
तुम मेरे आह्लादित मन में
तुम मेरे जीवन दर्शन में
तुम मेरे आकर्षण में
तुम मेरे क्षण क्षण में
तुम हो मेरे होने में।
2 comments:
EVERGREEN POEM..SO NICE..
अब तक मैं आपके मुक्तक देख कर अभिभूत होता रहा हूँ पर इस कविता ने मुझे बेहद रोमांचित किया है. आप में कितनी संभावनाएं और अभी सुसुप्त हैं उनका अन्वेषण अब आवश्यक हो गया है.
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