मैं शामिल होना चाहती हूँ
खुशियों में और उपहारों में
मैं शामिल होना चाहती हूँ
गीतों में और फनकारों में
मैं शामिल होना चाहती हूँ
अपनों में और ज़िम्मेदारों में
मगर नहीं रहना चाहती मैं
पहरों और पहरेदारों में
नहीं रहना चाहती मैं
कुपोषित सोच के गलियारों में
ये कैसे संभव होगा
नहीं जानती मैं
फिर भी इच्छा ये कैसी
जो मोल भाव नहीं कर पाती
नियमों के तर्क नहीं समझ पाती
बस तंग सा छोड़ जाती है
खुशियों में और उपहारों में
मैं शामिल होना चाहती हूँ
गीतों में और फनकारों में
मैं शामिल होना चाहती हूँ
अपनों में और ज़िम्मेदारों में
मगर नहीं रहना चाहती मैं
पहरों और पहरेदारों में
नहीं रहना चाहती मैं
कुपोषित सोच के गलियारों में
ये कैसे संभव होगा
नहीं जानती मैं
फिर भी इच्छा ये कैसी
जो मोल भाव नहीं कर पाती
नियमों के तर्क नहीं समझ पाती
बस तंग सा छोड़ जाती है
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