कब तक खुद में कैद रहोगे,
बाहर आकर देखो तुम
जीवन की राहों में कभी
खुद से टकरा कर देखो तुम
काई लगी इन दीवारों में
कब तक खुद में फिसलोगे
मन के जंगले से ही सही
लेकिन बाहर झाँक के देखो तुम
कभी तो कुछ पहचान के देखो तुम
जंग लगी इन चिटकनियों को
कभी तो खोल के देखो तुम
शायद डर भी जाओगे
लेकिन बाहर झांक के देखो तुम
बाहर की गरम रेत पर
कभी तो चल कर देखो तुम
घरौंदे रेत के बनाकर देखो तुम
शायद वो बह भी जायेंगे
फिर भी लहरों से लड़ते रहना तुम
एक दिन वो भी थक जायेंगी
बस एक बार तो अपनी कैद से निकलो तुम
खुद को खुद से छिटकने दो
शायद बिखर भी जाओगे
लेकिन बंटने से तो अच्छा है बिखर जाना
कोई छोर न पकड़ पायेगा तुम्हारे विस्तार का
हर ओर रहोगे तुम
बस एक बार तो अपनी कैद से निकलो
बाहर आकार देखो तुम ।
बाहर आकर देखो तुम
जीवन की राहों में कभी
खुद से टकरा कर देखो तुम
काई लगी इन दीवारों में
कब तक खुद में फिसलोगे
मन के जंगले से ही सही
लेकिन बाहर झाँक के देखो तुम
कभी तो कुछ पहचान के देखो तुम
जंग लगी इन चिटकनियों को
कभी तो खोल के देखो तुम
शायद डर भी जाओगे
लेकिन बाहर झांक के देखो तुम
बाहर की गरम रेत पर
कभी तो चल कर देखो तुम
घरौंदे रेत के बनाकर देखो तुम
शायद वो बह भी जायेंगे
फिर भी लहरों से लड़ते रहना तुम
एक दिन वो भी थक जायेंगी
बस एक बार तो अपनी कैद से निकलो तुम
खुद को खुद से छिटकने दो
शायद बिखर भी जाओगे
लेकिन बंटने से तो अच्छा है बिखर जाना
कोई छोर न पकड़ पायेगा तुम्हारे विस्तार का
हर ओर रहोगे तुम
बस एक बार तो अपनी कैद से निकलो
बाहर आकार देखो तुम ।