ये क्या नए तरीके हैं
नफ़रत की आतिशबाज़ी के
पहले पढ़ाओ धर्म-मज़हब के पाठ
फिर उनकी ठेकेदारी के!
एक चित्र, एक फ़िल्म
कर देती है क्या धर्म को इतना नाज़ुक
कि बनाने पड़ जायें हथियार, राम का नाम
और पैग़म्बर की आबरू बचाने के!
अब कुछ नए तरीके ढूँढो
मनुष्यता वापस लाने के
बेहिसाब आधुनिकता और
बेलगाम धार्मिकता की भीषणता से
निजात दिलाने के।
नफ़रत की आतिशबाज़ी के
पहले पढ़ाओ धर्म-मज़हब के पाठ
फिर उनकी ठेकेदारी के!
एक चित्र, एक फ़िल्म
कर देती है क्या धर्म को इतना नाज़ुक
कि बनाने पड़ जायें हथियार, राम का नाम
और पैग़म्बर की आबरू बचाने के!
अब कुछ नए तरीके ढूँढो
मनुष्यता वापस लाने के
बेहिसाब आधुनिकता और
बेलगाम धार्मिकता की भीषणता से
निजात दिलाने के।
1 comment:
मनुष्यता को अगर दासता की बेड़ियों में जकड़ देना हो तो सबसे सुगम तरीका है उसे जाति और धर्म की घुट्टी पिला दो. एक साज़िश है जो सदियों से अपना डेरा डाले हुए है. कसमसाते हुए निरीह लोगों के ज़ेहन कभी-कभी बगावत में अगर सर उठा भी लें तो कोहराम मच जाता है. धर्मान्धता पनपती ही इस लिए है क्योंकि डर है कहीं उसका खोखलापन उजागर न हो जाए और बेड़ियों में बंधे लोग स्वतंत्र होकर मनुष्यता की सच्ची राह पर न चल पड़ें.
"इस ज्वलंत विषय पर भावनाओं का उदगार अच्छा लगा."
रूप
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