ये आज सवेरा आया है,
ये आज सवेरा आया है,
अंधियारी काली रातों के बाद उजेरा आया है,
ये आज सवेरा आया है।।
उम्मीद की एक किरण के साथ,
जीवन में मतलब आया है,
आवाज़ उठाने की जन जन में कैसी हिम्मत लाया है,
ये आज सवेरा आया है।।
मैंने तुमने देखा है,
वो सपना क्या सच होगा?
जब गूँज उठी हैं राहें अब,
तो ये भी होगा, होगा, होगा॥
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3 comments:
aap acha likhti hain..phir chaye wo kavitayein ho ya article..likhte rahiye..padhne mein aacha lagta hai
सवेरा था हमेशा,
है हमेशा,
और
हमेशा ही रहेगा,
हमारी जिंदगी छोटी है इतनी,
और नज़रिया तंग इतना,
की हम विपरीत से इन दो सिरों को,
कभी भी एक कर के देखने की,
ज़रूरत ही नहीं महसूस करते.
कोई भी गर्त चाहे जितना गहरा,
हमारे रास्ते में हो मगर हम,
अगर कुछ सब्र से चलते रहे तो,
नए कितने शिखर फिर से मिलेंगे.
“रूप”
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