कभी मन चाहे पास रहें सब
कभी मन चाहे दूर चलें कहीं
कभी मन चाहे जीत जायें जग
कभी मन चाहे छोड़ चलें सब
कभी मन चाहे प्यार का बंधन
कभी मन चाहे बेपरवाही
कभी मन चाहे ज्ञानी बनना
कभी मन चाहे चरम अँधेरा
कभी मन चाहे विस्तार अपार
तो कभी मन चाहे सिमट के रहना
कभी मन चाहे सब सुखसाधन
कभी मन हो जाये वैरागी
कभी मन चाहे भावुक होना
तो कभी मन चाहे तटस्थ ही रहना
देखो ये मन भी तो एक सुविधा ही है
जो विकल्प दिलाता रहता है
पसंद बताता रहता है
सीमाएं निर्धारित करता है
फिर अकेला, दोराहे पर छोड़ जाता है
हाँ लेकिन ये भी तो सच है
सुविधा मन की, सबके पास कहाँ होती है।
कभी मन चाहे दूर चलें कहीं
कभी मन चाहे जीत जायें जग
कभी मन चाहे छोड़ चलें सब
कभी मन चाहे प्यार का बंधन
कभी मन चाहे बेपरवाही
कभी मन चाहे ज्ञानी बनना
कभी मन चाहे चरम अँधेरा
कभी मन चाहे विस्तार अपार
तो कभी मन चाहे सिमट के रहना
कभी मन चाहे सब सुखसाधन
कभी मन हो जाये वैरागी
कभी मन चाहे भावुक होना
तो कभी मन चाहे तटस्थ ही रहना
देखो ये मन भी तो एक सुविधा ही है
जो विकल्प दिलाता रहता है
पसंद बताता रहता है
सीमाएं निर्धारित करता है
फिर अकेला, दोराहे पर छोड़ जाता है
हाँ लेकिन ये भी तो सच है
सुविधा मन की, सबके पास कहाँ होती है।